True Stories

“कर्म की वापसी
हर एक कर्म की वापसी निश्चित है चाहे वह अच्छा कर्म हो या बुरा कर्म
आओ इसे उदाहरण के माध्यम से समझे


एक दुकानदार किसी साधु के पास गया और कहने लगा कि गुरु जी मेरी दुकान में बरकत नहीं हो रही है कृपया मेरी दुकान में अपने चरण डालें और मेरी मेरा मार्गदर्शन करें कुछ दिनों के बाद साधु उसी दुकान में गया और कहने लगा कि आप कम तोलते हैं तो दुकानदार बोला हां जी गुरु जी कभी-कभी कम तोल देता हूं साधु ने कहा पूरा तोला करो बरकत ही बरकत हो जाएगी साधु के जाने के बाद उस दुकानदार ने पूरा तोलना शुरू कर दिया और उसके दुकान की बरकत बढ़ने लगी फिर दुकानदार ने कुछ महीनों बाद लोगों से कहने लगा कि आप लोग खुद ही तो लो कर ले जाओ कुछ लोग ज्यादा तोल कर और कुछ लोग पूरा फुल कर ले जाने लगे उसकी दुकान में बरकत फिर भी फिर भी बढ़ने लगी कुछ महीनों के बाद दुकानदार सोने का टोल लेकर आ गया और उसे दुकान में बरकत बढ़ने का काम बरकरार जारी रहा 1 दिन दुकानदार ने बैठे बैठे मन में ख्याल आया कि मैंने सोने का तो लेकर आ गया हूं लगता है मुझ में एंकर आ गया है और दुकानदार सोने का टोल लेकर साधु के पास चला गया और अपनी एंकर वाली बात साधु ने कहा कि इस सोने के टोल का दरिया में कोदरिया में डाल कर आ जाओ दुकान आने का तो दरिया में फेंक दिया और अपनी दुकान में वापस चला गया दरिया का पानी जब कम हो गया तो सोने का टोल नजर आने लगा वहां से गुजर रहे किसी राहगीर ने सोने के टोल पर नजर डाली और देखा कि उसने पहचान लिया कि सोने का टोल उस दुकानदार का है और टोल को लेकर दुकानदार के पास वापस आ गया और उसने दुकानदार को वापस कर दिया दुकानदार बहुत हैरान हो गया और सोने के टोल को लेकर फिर से साधु के पास गया और उसने सारी बात बता दी उसने उसके बाद साधु ने कहा कि अगर तुम इसे एक सोने के टोल को कहीं भी छोड़ कर आ जाओगे यह वापस तुम्हारे पास आ जाएगा क्योंकि तुमने अपना कर्म बदल दिया है कर्म बदल दिया है तुमने खुद को सुधार लिया है कम तोलने वाला पूरा तोलने लगा है”

सारांश यह है कि इस कर्म की वापसी निश्चित है चाहे वह बुरा कर्म हो या अच्छा कर्म
क्योंकि कर्म ही सर्वोपरि है खुद को बदलें भाग्य को बदलें

कर्म की वापसी
हर एक कर्म की वापसी निश्चित है चाहे वह अच्छा कर्म हो या बुरा कर्म
आओ इसे उदाहरण के माध्यम से समझे


एक जंगल में साधु और डाकू साथ-साथ पैदल चल रहे थे कि अचानक बारिश होने लगी और बारिश की वजह से वह दोनों किसी पेड़ के नीचे खड़े हो गए उस दिन बारिश खूब हुई बारिश में जमीन नजर नहीं आ रही थी बारिश के रुकने के बाद वह दोनों पानी में ही पैदल चल पड़े कुछ दूर जाने के बाद वो दोनों किसी गड्ढे में गिर पड़े उस गड्ढे में गिरने पर साधु के पैर में कील चुभ गई और खून बहने लगा डाकू को सोने की पोटली मिल गई जब दोनों गड्ढों से बाहर आए तो साधु बहुत हैरान हो गया कि मैं साधु हूं और मेरी पैर में कील चुभ गई है और यह डाकू है इसको सोने की पोटली मिल गई है तभी अचानक से आकाशवाणी हुई सबसे पहले आकाशवाणी साधु के लिए हुई थी आकाशवाणी के मुखारविंद से साधु ने पूर्व जन्म से बहुत बुरे कर्म किए थे उसकी इस जन्म में सूली पर चढ़ने था क्योंकि वह साधु बनकर आधा कर्म कर रहा था इसलिए उसकी सूली फूल बनकर उसका बचाव कर रही थी अब डाकू ने पूर्व जन्म में बहुत अच्छे कर्म किए थे उसकी वजह से इस जन्म में राजा बनना था और राजा बनकर उसको बहुत धनसंपदा मिलने वाली थी क्योंकि वह डाकू बनकर बुरा कर्म कर रहा था इसलिए उसका बहुत बड़ी धनसंपदा छोटी सी पोटली में तब्दील हो गई और उसका नुकसान हो गया

सारांश यह है कि इस कर्म की वापसी निश्चित है चाहे वह बुरा कर्म हो या अच्छा कर्म
क्योंकि कर्म ही सर्वोपरि है खुद को बदलें भाग्य को बदलें